जिंदगी की किताब (पन्ना # 363)

🔸ज़िन्दगी की भागदौड़ में उम्र कैसे बीत गई पता ही नही चला यारों 🔸उंगली पकड़ कर चढ़ने वाले बच्चे कंधे तक कब आ गए पता ही नहीं चला 🔸साइकिल के पैडल ,स्कूटर की किक मारते मारते कैसे कारों में सैर करने लगे पता ही नहीं चला 🔸कभी हम थे माँ बाप की जिम्मेदारी, आज हम…

Quote # 127

दुख सभी को आता है पर फर्क इतना है कि दुखी परिवार मे सभी के दुख एक समान होते है सुखी परिवार मे हर एक का अपना स्पेशल दुख होता है । आपकी आभारी विमला विल्सन जय सच्चिदानंद 🙏🙏

पैसा हाय पैसा # जिंदगी की किताब (पन्ना # 333)

पैसा हाय पैसा …… आज हर व्यक्ति को सुख चाहिये , सुख चाहना ग़लत नही है पर पैसो से ही उसे सारा सुख मिल जायेगा ,ये जरूरी नही है …… अमेरिका मे एक बड़ा अरबपति बिजनेसमेन जिसका नाम एड्रेस कार्नेगी था , जब वह मरणासन्न की स्थिति मे था तो उसने अपने सेक्रेटरी को बुलाया…

स्वावलम्बन independency) , परावलम्बन # जिंदगी की किताब (पन्ना # 406)

क्या अच्छा है स्वावलम्बन होना या (independency) , परावलम्बन होना ? हर मनुष्य मे किसी भी कार्य को करने की अगाध क्षमता व शक्ति होती है । अपनी पसंद या नापसंद कार्यो के अनुसार उसकी हर क्षेत्र मे अलग अलग क्षमता होती है लेकिन होती जरूर है। बस जरूरत है अपने ऊपर भरोसा रखने की…